翻页 夜间
首页 > 料理仙姬 > 花嫁

绿野

Gorakhpur Loot Case: लूट के बाद फरार पुलिसकर्मियों के घर भेजा गया नोटिस, 22 दिनों बाद भी नहीं सुलझी गुत्थी_我的网站

刑事侦缉档案4

A |     जागरण संवाददाता, गोरखपुर। राजघाट पुल पर पांच अगस्त को बेलीपार के पिछौरा निवासी रविशंकर से तमंचे के बल पर 90 हजार रुपये लूट की गुत्थी अब तक पुलिस नहीं सुलझा पाई है। घटना के बाद संदेह के घेरे में आए चौकी इंचार्ज शुभम श्रीवास्तव समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित तो कर दिया गया, लेकिन उनकी भूमिका को लेकर रहस्य गहराता जा रहा है।,अब विभागीय जांच शुरू हो चुकी है।निलंबन के 20 दिन बाद भी पुलिस लाइन में आमद न कराने पर सभी पुलिसकर्मियों के घर नोटिस भेजा गया है। दरअसल, लूट की घटना के अगले ही दिन बदमाशों ने पीड़ित से तीन लाख रुपये और वसूलने की कोशिश की थी। पीड़ित ने इसकी शिकायत सीधे एसपी सिटी अभिनव त्यागी से की। जब केस दर्ज हुआ तो चौंकाने वाला खुलासा सामने आया- खुद को क्राइम ब्रांच का बताकर लूट करने वालों के पीछे पुलिसकर्मियों की मिलीभगत की आशंका सामने आयी, यही वजह रही कि नौसढ़ चौकी प्रभारी रहे शुभम श्रीवास्तव, महिला दारोगा समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया।,पूछताछ व जांच होने पर तीन पुलिसकर्मी बिना अनुमति के जीडी में किशोरी को बरामद करने का तथ्य दर्ज कर मुंबई चले गए थे। निलंबन के बाद उन्होंने 12 से 22 अगस्त तक के लिए मेडिकल भेजा, लेकिन मेडिकल की मियाद खत्म होने के बावजूद अब तक पुलिस लाइन में आमद नहीं कराई।,सूत्रों के मुताबिक, विभाग ने अब उनके मूल पते पर नोटिस भेजा है और गैरहाजिर रहने की वजह पूछी है।इसके अलावा इंदौर के जिस डाक्टर से निलंबित पुलिसकर्मियों ने मेडिकल बनवाकर भेजा था, उसका भी सत्यापन कराया जाएगा। विभाग यह जानना चाहता है कि मेडिकल सही है या सिर्फ जांच से बचने का बहाना।एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने कहा कि निलंबित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। लूटकांड की विवेचना भी तेजी से की जा रही है। उन्होंने बताया बहुत जल्द मामले की गुत्थी सुलझा ली जाएगी और सच्चाई सामने आ जाएगी।,यह भी पढ़ें- सिस्टम पर सवाल: आरोपी कर्मचारी को पहले किया बर्खास्त, फिर कर दिया बहाल घटनाक्रम की टाइमलाइन

  • 05 अगस्त: बेलीपार के रविशंकर से राजघाट पुल पर कार सवारों ने 90 हजार रुपये लूटे।
  • 06 अगस्त: बदमाशों ने पीड़ित से तीन लाख रुपये और वसूलने की कोशिश की।
  • 06 अगस्त: पीड़ित ने एसपी सिटी से शिकायत की, राजघाट थाने में केस दर्ज।
  • 07 अगस्त: लूटकांड में पुलिस की भूमिका संदिग्ध दिखने पर पांच पुलिसकर्मी निलंबित हुए।
  • 12 अगस्त: निलंबित दरोगा व तीन सिपाहियों ने 10 दिन का मेडिकल भेजा, आमद नहीं कराई।
  • 22 अगस्त: मेडिकल की मियाद खत्म हो गई, लेकिन पुलिस लाइन में हाजिरी नहीं दी।
  • 24 अगस्त: विभाग ने मूल पते पर नोटिस भेजा, मेडिकल सत्यापन के आदेश दिए।
。    राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ : संभल में बीती 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा में चार लोगों की मौत और तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी सहित 30 से अधिक पुलिसकर्मियों के घायल होने के प्रकरण की तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने रिपोर्ट गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में तमाम पहलुओं के साथ एक बहुत बड़ा संकेत भी मिला है। ,इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग के अन्य सदस्य भारतीय पुलिस सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी पूर्व डीजीपी अरविंद कुमार जैन और भारतीय प्रशासनिक सेवा के रिटायर्ड अधिकारी अमित मोहन प्रसाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुरुवार को मुलाकात की। जांच समिति ने बीते वर्ष 24 नवंबर को संभल में शाही जामा मस्जिद के पास भड़की हिंसा पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।,हरिहर मंदिर पर बाबर काल के साक्ष्य संभल जामा मस्जिद में हरिहर मंदिर होने और हिंदू पक्ष को पूजा करने का अधिकार देने का प्रकरण कोर्ट में लंबित होने के बीच न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में मस्जिद में हरिहर मंदिर के साक्ष्य मिले हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया हरिहर मंदिर पर बाबर काल के साक्ष्य मिले हैं। हरिहर मंदिर की नींव में बाबरी काल के प्रमाण मिले हैं। इसके अलावा रिपोर्ट में जो सबसे बड़ा दावा किया गया है वो ये है कि संभल में सिर्फ 15 प्रतिशत हिंदू परिवार बचे हैं।,संभल में कब और क्यों शुरु हुआ था विवाद विवाद बीते वर्ष 19 नवंबर से शुरू हुआ है, जब अधिवक्ता हरि शंकर जैन और विष्णु शंकर जैन सहित हिंदू याचिकाकर्ताओं ने संभल की जिला अदालत में एक मुकदमा दायर किया था जिसमें दावा किया गया था कि शाही जामा मस्जिद एक मंदिर के ऊपर बनाई गई थी।,यह भी पढ़ें- Sambhal Violence Report : संभल हिंसा प्रकरण में गठित जांच आयोग ने मुख्यमंत्री को सौंपी 450 पन्ने की रिपोर्ट, अब होगा एक्शन अदालत के आदेश पर उसी दिन (19 नवंबर) एक सर्वेक्षण किया गया, उसके बाद 24 नवंबर को एक और सर्वेक्षण किया गया। इसी सर्वेक्षण के दौरान अशांति फैल गई और जिसके परिणामस्वरूप चार लोगों की मौत हो गई। यह भी पढ़ें- Sambhal Violence Report :दंगों से जूझते रहे संभल में हिंदू आबादी 45 से घटकर 15-20 प्रतिशत, प्रशासन व पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल पुलिस ने हिंसा में संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क और मस्जिद समिति के प्रमुख जफर अली सहित 2,750 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज किया था।。

Current article:http://d2ov.shaihanhuangwoshang.cyou/list_etx9to0/fnq5n.html

Published on:07:39:59